मुखौटे के अंदर मुखौटा
इंसान अंदर से कुछ, बाहर से कुछ और होता
ना दिलग्गी करना दिले नादान कियूकी हर इंसान वफादार नहीं होता
इंसान अंदर से कुछ, बाहर से कुछ और होता
ना दिलग्गी करना दिले नादान कियूकी हर इंसान वफादार नहीं होता
क़ीमत भी अदा करनी पड़ी हमे उस रिश्ते की जिसकी कोई क़ीमत न थी
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें